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    डा. वी.के. वर्मा ने आपदा मित्रों का स्वागत कर बढाया हौसला

     डा. वी.के. वर्मा ने आपदा मित्रों का स्वागत कर बढाया हौसला

     Editor =Sunil Soni,Basti Dastak 

    बस्ती। पटेल एमएमएच हॉस्पिटल एण्ड पैरा मेडिकल काजेल गोटवा के प्रबंधक होम्योपैथ के वरिष्ठ चिकित्सक डा.वी.के. वर्मा ने एस.डी.आर.एफ. मुख्यालय, लखनऊ से 12 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे आपदा मित्र प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र, स्मृति चिन्ह भेटकर उनका उत्साहवर्धन किया।

    डा. वी.के. वर्मा इंस्ट्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस बसुआपार के जीएनएम आपदा प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटी की छात्राओं रूपा मौर्या, लक्ष्मी यादव, महिमा यादव, काजल कुमारी, शिवांगी चौधरी, प्रियंका चौधरी, ज्योति वर्मा, खुशबू गौतम, वर्षा भारती, संजनी वर्मा से आपदा प्रशिक्षण के बारे में मिले जानकारी के बारे में प्रबंधक डा. वी.के. वर्मा विस्तार से पूंछा। कहा कि उन्हें जो प्रशिक्षण मिला है इसकी जानकारी अन्य छात्रों को भी दें जिससे संकट की घड़ी में वे लोगों का जीवन बचाने के साथ ही बाढ, सूखा, आपदा की स्थिति में योगदान दे सके।

    एस.डी.आर.एफ. मुख्यालय, लखनऊ में 12 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आपदा मित्र प्रतिभागियों का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण में विभिन्न जनपदों से आए प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान अर्जित किया। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण किया।

    जिला चिकित्सालय में आयुष चिकित्साधिकारी डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि आपदा मित्र योजना भारत सरकार की एक महत्त्वपूर्ण पहल है, जिसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का एक सशक्त समूह तैयार करना है, जो आपदा के समय प्रारंभिक प्रतिक्रिया प्रदान कर सके।

    डा. वर्मा और प्राचार्य डा. हिमांशी वर्मा ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को खोज एवं बचाव , प्राथमिक उपचार, सीपीआर, अग्नि सुरक्षा, बाढ़ एवं भूकंप जैसी आपदाओं में राहत कार्य, तथा आपातकालीन संचार प्रणाली की जानकारी दी गई। आपदा मित्र जिले के लिए एक सशक्त संसाधन के रूप में कार्य कर सकते हैं। आपदा की स्थिति में ये प्रशिक्षित स्वयंसेवक त्वरित सहायता प्रदान कर जन-धन की हानि को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही, ये अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैलाकर आपदा न्यूनीकरण एवं तैयारी को बढ़ावा देंगे।


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